part 1

वक़्त नूर को बेनूर बना देता है, छोटे से जख्म को नासूर बना देता है,
कौन चाहता है अपनों से दूर रहना पर वक़्त सबको मजबूर बना देता है.

डर मुझे भी लगा फांसला देख कर,
पर मैं बढ़ता गया रास्ता देख कर.
खुद ब खुद मेरे नज़दीक आती गई,
मेरी मंज़िल मेरा हौंसला देख कर…..!!

“उनसे कहना की क़िस्मत पे ईतना नाज ना करे ,
हमने बारिश मैं भी जलते हुए मकान देखें हैं…… !!!!!
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ले दे के अपने पास फ़कत एक नजर तो है,
कयुं देखे जिंदगी को किसी की नजर से हम..
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“जिसे पूजा था हमने वो खुदा तो न बन सका,
हम ईबादत करते करते फकीर हो गए…!!!
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वो एक रात जला……. तो उसे चिराग कह दिया !!!
हम बरसो से जल रहे है ! कोई तो खिताब दो .!!!
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जलते हुए दिल को और मत जलाना,
रोती हुई आँखों को और मत रुलाना,
आपकी जुदाई में हम पहले से मर चुके है,
मरे हुए इंसान को और मत मारना.
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जरा सी चोट से शीशे की तरह टूट गया ,
दिल तो कमबख्त मेरा मुझसे भी बुजदिल निकला ………
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मुझसा ही आलसी मेरा खुदा है !
ना मै कुछ मांगता हूँ, ना वो कुछ देता है !! ”
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ऐ बुरे वक़्त ””’
जरा तेज चल ।।।
देख उस मोड़ को ””’
वहा से तू बदलने वाला हे।
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रिश्तोँ की हकीकत कोई क्या समझेगा
दिलोँ की जरूरत को कोई क्या समझेगा
मेरे दोस्त की मुस्कुराहट ही तो मेरी जिंदगी है
इस मुस्कुराहट की कीमत कोई क्या समझेगा.
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सोचते है, अब हम भी सीख ले यारों बेरुखी करना,,,,,,
सबको मोहब्बत देते-देते, हमने अपनी कदर खो दी है,,,,,,!
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शायद कोई तराश कर किस्मत संवार दे !
यही सोच कर मैं उम्र भर पत्थर बना रहा !!

किसी के ऐब को तू बेनकाब ना कर,
खुदा हिसाब करेगा तू खुद हिसाब ना कर,
बुरी नज़र से ना देख मुझ को देखने वाले,
मैं लाख बुरा सही तू अपनी नज़र खराब ना कर…..
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ये भी अच्छा हुआ कि,
कुदरत ने रंगीन नही रखे ये आँसू .
वरना जिसके दामन में गिरते,
वो भी … बदनाम हो जाता …
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आज लाखो रुपये बेकार है
वो एक रुपये के सामने
जो माँ स्कूल जाते वक्त देती थी.
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आंसुओसे पलके भीगा लेता हूँ याद तेरी आती है तो रो लेता हूँ
सोचा की भुलादु तुझे मगर, हर बार फ़ैसला बदल देता हूँ!
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मैं मर भी जाऊ, तो उसे ख़बर भी ना होने देना ….
मशरूफ़ सा शख्स है, कही उसका वक़्त बर्बाद ना हो जाये …
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एक ही शख्स था मेरे मतलब का दोस्तों
वो शख्स भी मतलबी निकला……!!!”
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झुठ बोलकर तो मैं भी दरिया पार कर जाता,
मगर डूबो दिया मुझे सच बोलने की आदत ने…”
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तुझे हर बात पे मेरी जरूरत पड़ती ,
काश मैं भी कोई झूठ होता ………”
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उठाना खुद ही पडता है थका टूटा बदन अपना
कि जब तक सांस चलती है कोई कंधा नहीं देता
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ऐ मेरा जनाज़ा उठाने वालो, देखना कोई बेवफा पास न हो.
अगर हो तो उस से कहना, आज तो खुशी का मौका है, उदास न हो.
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अंधेरे मे रास्ता बनाना मुश्किल होता है,
तूफान मे दीपक जलना मुश्किल होता है,
दोस्ती करना गुनाह नही,
इसे आखिरी सांस तक निभाना मुश्किल होता है.
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पत्थर की दुनिया जज्बात नहीं समझती ;
दिल में क्या है वो बात नहीं समझती ;
तन्हा तो चाँद भी सितारों के बीच में है ;
पर चाँद का दर्द वो रात नहीं समझती।
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“दोस्तों की कमी को पहचानते हैं हम,
दुनिया के गमो को भी जानते हैं हम,
आप जैसे दोस्तों का सहारा है,
तभी तो आज भी हँसकर जीना जानते हैं हम.”

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जिंदगी एक आइना है, यहाँ पर हर कुछ छुपाना पड़ता है|
दिल में हो लाख गम फिर भी महफ़िल में मुस्कुराना पड़ता है |
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राज ना आयेगा मुजपर अब कोई भी सितम तेरा,
ईतना बिखर गया हू कि दरिंदगी भी तेरी शमँसार हो जाये.
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जिंदगी आ बैठ, ज़रा बात तो सुन,
मुहब्बत कर बैठा हूँ, कोई मशवरा तो दे।
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तुम मुझे कभी दिल, कभी आंखों से पुकारो,
ये होठों का तकल्लुफ़ तो ज़मानें के लिये है…!!!
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मेरी सब कोशिशें नाकाम थी उनको मनाने कि,

कहाँ सीखीं है ज़ालिम ने अदाएं रूठ जाने कि..
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चीखें भी यहाँ गौर से सुनता नहीं कोई;
अरे,
किस शहर में तुम शेर सुनाने चले आये!…….
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यूँ ही वो दे रहा है क़त्ल कि धमकियाँ..,
हम कौन सा ज़िंदा हैं जो मर जाएंगे..
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“वो छोटी छोटी उड़ानों पे गुरुर नहीं करता
जो परिंदा अपने लिये आसमान ढूँढ़ता है !!”
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तेरे ही अक्स को तेरा दुश्मन बना दिया
आईने ने मज़ाक़ में सौतन बना दिया….
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कम नहीं मेरी जिंदगी के लिए, चैन मिल जाये दो घडी के लिए,
ऐ दिलदार कौन है तेरा क्यों तड़पता है यू किसी के लिए.
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ये इश्क भी एक अजीब एहसास होता है…
अल्ज़फों से ज्यादा निगाहोसे बया होता है…
हर पल बस उसके गम और खुशी की फ़िक्र होती है…
इसी एहसास से तो हमको जीने का गुमान होता है…
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उगता हुआ सूरज दुआ दे आपको
खिलता हुआ फूल खुशबू दे आपको
हम तो कुछ भी देने के बाबिल नहीं,
देनेवाला हज़ार खुशिया दे आपको!
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कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है ,
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है
ये तेरा दिल समझता है, या मेरा दिल समझता है
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आँखों से आँखों का मेल जब होता है,
दिल में एक चाहत सी जाग उठती है,
रात को सपनो में उसका चेहरा होता है,
ज़िन्दगी भी खूबसूरत अफसाना लगती ह
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सादगी किसी श्रृंगार से कम नहीं होती ,
चिंगारी किसी अंगार से कम नहीं होती!
ये तो अपनी अपनी सोच का फर्क है बरना ,
दोस्ती किसी प्यार से कम नहीं होती.
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उसकी यादों को किसी कोने में छुपा नहीं सकता,
उसके चेहरे की मुस्कान कभी भुला नहीं सकता,
मेरा बस चलता तो उसकी हर याद को भूल जाता,
लेकिन इस टूटे दिल को मैं समझा नहीं सकता
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लोग कहते हैं की इतनी दोस्ती मत करो
के दोस्त दिल पर सवार हो जाए
में कहता हूँ दोस्ती इतनी करो के
दुश्मन को भी तुम से प्यार हो जाए….
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सच्चाई को अपनाना आसान नहीं
दुनिया भर से झगड़ा करना पड़ता है

जब सारे के सारे ही बेपर्दा हों
ऐसे में खु़द पर्दा करना पड़ता है
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किसी को इश्क़ की अच्छाई ने मार डाला,
किसी को इश्क़ की गहराई ने मार डाला,
करके इश्क़ कोई ना बच सका,
जो बच गया उससे तन्हाई ने मार डाला
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तू चाँद और मैं सितारा होता,
आसमान में एक आशियाना हमारा होता,
लोग तुम्हे दूर से देखते,
नज़दीक़ से देखने का हक़ बस हमारा होता..
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और क्या चीज़ कुर्बान करू आप पर,
दील जिगर आपका जींदगी आपकी.
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ैनदी जब किनारा छोड़ देती है
राह की चट्टान तक तोड़ देती है

बात छोटी सी अगर चुभ जाते है दिल में
ज़िन्दगी के रास्तों को मोड़ देती है
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अपनी सांसों में महकता पाया है तुझे, हर खवाब मे बुलाया है तुझे,
क्यू न करे याद तुझ को, जब खुदा ने हमारे लिए बनाया है तुझे.
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हम वो नहीं जो दिल तोड़ देंगे,
थाम कर हाथ साथ छोड़ देंगे,
हम दोस्ती करते हैं पानी और मछली की तरह,
जुदा करना चाहे कोई तो हम दम तोड़ देंगे …
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तूने देखा है कभी एक नज़र शाम के बाद
कितने चुपचाप से लगते हैं शज़र शाम के बाद
तू है सूरज तुझे मालूम कहाँ रात का दुख
तू किसी रोज़ मेरे घर में उतर शाम के बाद
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मौसम को मौसम की बहारों ने लूटा,
हमे कश्ती ने नहीं किनारों ने लूटा,
आप तो डर गये मेरी एक ही कसम से,
आपकी कसम देकर हमें तो हज़ारों ने लूटा….
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नीम का पेड़ था बरसात थी और झूला था
गाँव में गुज़रा ज़माना भी ग़ज़ल जैसा था
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दुनिया तेरी रौनक़ से मैं अब ऊब रहा हूँ
तू चाँद मुझे कहती थी मैं डूब रहा हूँ
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चुपके चुपके पहले वो ज़िन्दगी में आते हैं,
मीठी मीठी बातों से दिल में उतर जाते है,
बच के रहना इन हुसन वालों से यारो,
इन की आग में कई आशिक जल जाते हैं
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मुझे नींद की इजाज़त भी उसकी यादों से लेनी पड़ती है,
जो खुद तो सो जाता है, मुझे करवटों में छोड़ कर!
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लाख हों हम में प्यार की बातें
ये लड़ाई हमेशा चलती है.

उसके इक दोस्त से मैं जलता हूँ
मेरी इक दोस्त से वो जलती है
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मैँ कैसा हूँ’ ये कोई नहीँ जानता,
मै कैसा नहीँ हूँ’
ये तो शहर का हर शख्स बता सकता है…
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ज़िन्दगी में इक मुकाम आया तो था
भूले से सही तेरा सलाम आया तो था
न जानें तुझे खबर है, है की नहीं
मेरे अफ़साने में तेरा नाम आया तो था
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“जाने कब-कब किस-किस ने कैसे-कैसे तरसाया मुझे,
तन्हाईयों की बात न पूछो महफ़िलों ने भी बहुत रुलाया मुझे”
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मुस्कराते रहो तो दुनिया आप के कदमों मे होगी
वरना आसुओ को तो आखे भी जगह नही देती
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घर के बाहर भले ही दिमाग ले जाओ.. क्योंकि दुनियाँ एक ‘बाजार’ है,
.
.
लेकिन घर के अंदर सिर्फ दिल ले जाओ…क्योंकि वहाँ एक ‘परिवार’ है !!!!
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में पिए रहु या न पिए रहु,लड़खड़ाकर ही चलता हु ,
क्योकि तेरी गली कि हवा ही मुझे शराब लगती हे
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बड़ी तब्दीलियां लाया हूँ अपने आप में लेकिन,
बस तुमको याद करने की वो आदत अब भी है।।
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कुछ ऐब का होना भी ठीक ही है मालिक….
सुना है आप अच्छे लोगो को जल्दी बुला लेते हो….
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हमसे ना कट सकेगा अंधेरो का ये सफर…
अब शाम हो रही हे मेरा हाथ थाम लो…. !!!
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“कोई तेरे साथ नहीं है तो गम ना कर,
खुद से बढ़कर कोई दुनिया में हमसफ़र नहीं होता !!”
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तेरी वफाओं का समन्दर किसी और के लिए होगा,
हम तो तेरे साहिल से रोज प्यासे ही गुजर जाते हैं !!
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नजर में बदलाव है उनकी, हमने देखा है आजकल !
एक अदना सा आदमी भी , आँख दिखा जाता है !!
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पूछता हे जब कोई की। दुनिया मै मोहब्बत है कहा ।।
मुस्कुरा देता हु मै ओर याद आ जाती है माँ
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कोई आँखों में बात कर लेता है,
कोई आँखों आँखों में मुलाकात कर लेता है.
मुश्किल होता है जवाब देना…
जब कोई खामोश रह करभी सवाल कर लेता है!
********
हमें तो प्यार के दो लफ्ज ही नसीब नहीं,
और बदनाम ऐसे जैसे इश्क के बादशाह थे हम..
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तुझे तो मोहब्बत भी तेरी ऒकात से ज्यादा की थी …..
अब तो बात नफरत की है , सोच तेरा क्या होगा…. .
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वो कहने लगी, नकाब में भी पहचान लेते हो हजारों के बीच ?
में ने मुस्करा के कहा, तेरी आँखों से ही शुरू हुआ था “इश्क”, हज़ारों के बीच.”
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शौक से तोड़ो दिल मेरा मैं क्यों परवाह करूँ…..!
तुम ही रहते हो इसमें अपना ही घर उजाड़ोगे….!
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ये मुकरने का अंदाज़ मुझे भी सीखा दो
वादे नीभा-नीभा के थक गया हूँ मैं…
*********
न जाने क्या कशिश है …
उनकी मदहोश आँखों में
नज़र अंदाज़ जितना करो
नज़र उन्हीं पे ही पड़ती है …
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तन्हाई के लम्हे अब तेरी यादों का पता पूछते हैं…
तुझे भूलने की बात करूँ तो… ये तेरी खता पूछते हैं…!!
********
आज उसे एहसास मेरी मोहब्बत का हुआ
शहर में जब चर्चा….मेरी शोहरत का हुआ,
नाम नहीं लेती…..मुझे अब जान कहती है
देखो कितना असर उसपर दौलत का हुआ…
********
घेर लेने को मुझे जब भी बलाएँ आ गईं
ढाल बन कर सामने माँ की दुआएँ आ गईं
*******
अजब मुकाम पे ठहरा हुआ है काफिला जिंदगी का,
सुकून ढूंढने चले थे, नींद ही गंवा बैठे”…..!!!
********
हमें भुलाकर सोना तो तेरी आदत ही बन गई है, अय सनम;
किसी दिन हम सो गए तो तुझे नींद से नफ़रत हो जायेगी।
********
क्यों पहनती हो चूड़ी, क्यों पहनती हो कंगना,
सजने का ही शोक है तो फिर बना लो न सजना |
********
पहले हाथ से लिखा प्रेम पत्र देते थे, 
अब touchscreen फ़ोन पर टाइप करके भेज देते हैं…..
इश्क़ में ये दुनिया फिर से अँगूठा-छाप
हो गयी”
********
जिंदगी हमारी यूं सितम हो गई
खुशी ना जानें कहां दफन हो गई
*********
लिखी खुदा ने मुहब्बत सबकी तकदीर में
हमारी बारी आई तो स्याही खत्म हो गई
********
ये ना पूछ कितनी शिकायतें हैं तुझसे ऐ ज़िन्दगी,
सिर्फ इतना बता की तेरा कोई और सितम बाक़ी तो नहीं.
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कभी हक़ीक़त में भी बढ़ाया करो ताल्लुक़ हमसे….
अब ख़्वाबों की मुलाक़ातों से तसल्ली नहीं होती….”
********
“उम्र भर चलते रहे …मगर कंधो पे आये कब्र तक,
बस कुछ कदम के वास्ते गैरों का अहसान हो गया……!!
********
ग़ज़ल लिखी हमने उनके होंठों को चूम कर,
वो ज़िद्द कर के बोले… ‘फिर से सुनाओ’…..!!”
********
मोहब्बत भी उस मोड़ पे पहुँच चुकी है,
कि अब उसको प्यार से भी मेसेज करो,
तो वो पूछती है कितनी पी है?………
**********
बुलंद हो होंसला तो मुठी में हर मुकाम हे,ll
मुश्किले और मुसीबते तो ज़िंदगी में आम हे,ll
ज़िंदा हो तो ताकत रखो बाज़ुओ में लहरो के खिलाफ तैरने कि ,
क्योकि लहरो के साथ बहना तो लाशो का काम हे.
********
जो लोग दिल के अच्छे होते है,..
दिमाग वाले अक्सर उनका जम कर फायदा उठाते है ।।
********
एक बार और देख के आज़ाद कर दे मुझे,
में आज भी तेरी पहली नज़र के कैद में हूँ…!!
********
शुक्रिया मोहब्बत तुने मुझे गम दिया,
वरना शिकायत थी ज़िन्दगी ने जो भी दिया कम दिया…!!
********
रुखसत हुए तेरी गली से हम आज कुछ इस कदर……..
लोगो के मुह पे राम नाम था….
और मेरे दिल में बस तेरा नाम था….
********
तेरे चेहरे पर अश्कों की लकीर बन गयी ,
जो न सोचा था तू वो तक़दीर बन गयी !!.
********
हमने तो फिराई थी रेतो पर उंगलिया ,
मुड़ कर देखा तो तुम्हारी “तस्वीर “बन गयी .!!
********
“बिकता है गम इश्क के बाज़ार में,
लाखों दर्द छुपे होते हैं एक छोटे से इंकार में,
हो जाओ अगर ज़माने से दुखी,
तो स्वागत है हमारी दोस्तीके दरबार में.”
********
क्या रखा है अपनी ज़िँदगी के इस अफ़साने मेँ..
कुछ गुज़र गई अपना बनाने मेँ, कुछ गुज़र गई अपनो को मनाने मेँ..
********
वो इस चाह में रहते है के हम उनको उनसे मांगे,
और हम इस गुरुर में रहते है के हम
अपनी ही चीज़ क्यूँ मांगे…………..
********
उधार के उजाले से चमकने वाले चाँद कि आँखों में चुभता हूँ
जुगनू हूँ थोडा लेकिन खुद का उजाला लेके घूमता हूँ
********
दुश्मन के सितम का खौफ नहीं हमको,
हम तो दोस्तों के रूठ जाने से डरते हैं…
********
“सुना है सब कुछ मिल जाता है ‘दुआ’ से , मिलते हो खुद ? या माँगु तुम्हें ‘खुदा’ से …..!!
********
एक फूल अजीब था,
कभी हमारे भी बहुत करीब था,
जब हम चाहने लगे उसे,
तो पता चला वो किसी दूसरे का नसीब था ।
********
उठाये जो हाथ उन्हें मांगने के लिए,
किस्मत ने कहा, अपनी औकात में रहो।
********
मुझे परिन्दा न समझो यारो ,
मै वो नही जो तूफ़ा में आशियाँ बदल ल
********

अफवाह थी कि मेरी तबियत खराब है,
लोगों ने पूछ पूछ कर बीमार कर दिया…
********
मेने तक़दीर पे यक़ीन करना छोड़ दिया है ___! जब इंसान बदल सकते है तो ये तकदीर क्यो नही __?
********
लोग पूछते हैं की तुम क्यूँ अपनी मोहब्बत का इज़हार नहीं करते,
हमने कहा जो लब्जों में बयां हो जाये
सिर्फ उतना हम किसी से प्यार नहीं करते…!!!
********
मज़हब, दौलत, ज़ात, घराना, सरहद, ग़ैरत, खुद्दारी,
एक मुहब्बत की चादर को, कितने चूहे कुतर गए…
********
जिसको गलत तस्वीर दिखाई, उसको ही बस खुश रख पाया..
जिसके सामने आईना रक्खा, हर शख्स वो मुझसे रूठ गया.
********
लोगों ने पूछा कि कौन है वोह
जो तेरी ये उदास हालत कर गया ??
मैंने मुस्कुरा के कहा उसका नाम
हर किसी के लबों पर अच्छा नहीं लगता …!
********
आंखे कितनी भी छोटी क्यु ना हो,
ताकत तो उसमे सारे आसमान देखने कि होती हॆ…
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सुनी थी सिर्फ हमने ग़ज़लों में जुदाई की बातें ;
अब खुद पे बीती तो हक़ीक़त का अंदाज़ा हुआ !!
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टुकड़े पड़े थे राह में किसी हसीना की तस्वीर के…
लगता है कोई दीवाना आज समझदार हो गया है…!!!!
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आपकी यादें भी हैं, मेरे बचपन के खिलौनो जैसी ..
तन्हा होते हैं तो इन्हें ले कर बैठ जाते हैं…!
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किन लफ्ज़ो में बयां करूँ अपने दर्द को सुनने वाले तो बहुत है समझने वाला कोई नहीं
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सफ़र के इतिहास कि बात न करो ऐ दोस्त बस मुझे अगला कदम रखने के लिए जमीन दो
*********
कौन कहता है मुझे ठेस का एहसास नहीं,
जिंदगी एक उदासी है जो तुम पास नहीं,
मांग कर मैं न पियूं तो यह मेरी खुद्दारी है,
इसका मतलब यह तो नहीं है कि मुझे प्यास नहीं.
*********
न मेरा एक होगा , न तेरा लाख होगा,
तारिफ तेरी ,न मेरा मजाक होगा,
गुरुर न कर शाह-ए-शरीर का,
मेरा भी खाक होगा , तेरा भी खाक होगा
*********
मुहब्बत आजमानी है, तो बस इतना ही काफी है जरा सा रूठ कर देखो, मनाने कोन आता है
*********
“ये वक़्त बेवक़्त मेरे ख्यालों
में आने की आदत छोड़ दो तुम,
कसूर तुम्हारा होता है और
लोग मुझे आवारा समझते हैं”
********
ज़िन्दगी सस्ती है
जीने के ढंग महँगे हैं
********
एक छुपी हुई पहचान रखता हूँ,
बाहर शांत हूँ, अंदर तूफान रखता हूँ,
रख के तराजू में अपने दोस्त की खुशियाँ,
दूसरे पलड़े में मैं अपनी जान रखता हूँ।
********
हर मुलाक़ात पर वक़्त का तकाज़ा हुआ ;
हर याद पे दिल का दर्द ताज़ा हुआ .!
*******
जिंदगी में हद से ज्यादा ख़ुशी और हद से ज्यादा गम का कभी किसी से इज़हार मत करना।
क्योंकि, ये दुनिया बड़ी ज़ालिम है।
हद से ज्यादा ख़ुशी पर ‘नज़र’ और हद से ज्यादा गम पर ‘नमक’ लगाती है।
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खुदा पर भरोसे का हुनर सिख ले ऐ दोस्त सहारे जितने भी सच्चे हो साथ छोड़ ही जाते है
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सूरज नहीं डूबा ज़रा सी शाम होने दो”
मैं खुद लौट जाउंगा मुझे नाकाम होने दो”
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूँढ़ते हो क्यों
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले नाम होने
दो..
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जब तक ना लगे बेवफाई की ठोकर
हर कीसी को अपनी पसंद पे नाझ होता है।
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घृणा के घाव से जो लहू टपकता है उससे नफरत
ही पलती है
प्यार के घाव से जो दर्द मिलता है उससे भी राहत मिलती है .
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हकीकत को हादसे का नाम लेकर खुद को तो संभाल लिया हमने
पर दिल को ख्वाबो से निजात देना इतना भी आसन नहीं है जहामे …
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ज़िंदा हो तो ताकत रखो बाज़ुओ में लहरो से लड़ने की,
क्योकि लहरो के साथ बहना तो लाशो का काम है .
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गुज़र जायेगी ज़िन्दगी उसके बगैर भी,
वो हसरत-ए-ज़िन्दगी है ….
शर्त-ए-ज़िन्दगी तो नहीं……!!
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याददाश्त की दवा बताने में सारी दुनिया लगी है !!!…
तुमसे बन सके तो तुम हमें भूलने की दवा बता दो…!!!
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कुछ तो शराफ़त सीख ले, ए इश्क़, शराब से..;
बोतल पे लिखा तो है,मैं जान लेवा हूँ..!!
********
“उनसे क़ह दे कोई जाकर कि हमारी सजा कुछ कम कर दे,
हम पैशे से मुजरिम नहीं हैं बस गलती से इश्क हुआ है।…”
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चिराग कोई जलाओ की हो वजूद का एहसास,
इन अँधेरों में मेरा साया भी छोड़ गया मुझको !!!
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उसके नर्म हाथों से फिसल जाती है चीज़ें अक्सर ….,
मेरा दिल भी लगा है उनके हाथो , खुदा खैर करे …
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आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की…
लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं….
**********
मेरी इबादतों को ऐसे कर कबूल ऐ मेरे खुदा,
के सजदे में मैं झुकूं तो मुझसे जुड़े हर रिश्ते की जिंदगी संवर जाए..!!
********
अब तुझे न सोचू तो, जिस्म टूटने-सा लगता है..
एक वक़्त गुजरा है तेरे नाम का नशा करते~करते !
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“ना छेड किस्सा-ए-उल्फत, बडी लम्बी कहानी है,
मैं ज़माने से नहीं हारा, किसी की बात मानी है,,,,,,।।
********
रोज तारीख बदलती है,
रोज दिन बदलते हैं…
रोज अपनी उमर भी बदलती है…
रोज समय भी बदलता है…
हमारे नजरिये भी वक्त के साथ बदलते हैं…
बस एक ही चीज है जो नहीं बदलती…
और वो हैं हम खुद और बस ईसी वजह से
हमें लगता है कि अब जमाना बदल गया है!!
********
“शाम खाली है जाम खाली है,ज़िन्दगी यूँ गुज़रने वाली है,
सब लूट लिया तुमने जानेजाँ मेरा,मैने तन्हाई मगर बचा ली है”
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आग सूरज मैँ होती हैँ जलना जमीन को पडता हैँ,
मोहब्बत निगाहेँ करती हैँ तडपना दिल को पडता हैँ.
********
शायरी इक शरारत भरी शाम है,
हर सुख़न इक छलकता हुआ जाम है,
जब ये प्याले ग़ज़ल के पिए तो लगा मयक़दा तो बिना बात बदनाम है….
********
दोस्ती उन से करो जो निभाना जानते हो,
नफ़रत उन से करो जो भूलना जानते हो,
ग़ुस्सा उन से करो जो मानना जानता हो,
प्यार उनसे करो जो दिल लुटाना जानता हो.
*********
गुलाब की खुशबू भी फीकी लगती है,
कौन सी खूशबू मुझमें बसा गई हो तुम,
जिंदगी है क्या तेरी चाहत के सिवा,
ये कैसा ख्वाब आंखों में दिखा गई हो तुम.
**********
जाम पे जाम पीने से क्या फायदा दोस्तों,
रात को पी हुयी शराब सुबह उतर जाएगी,
अरे पीना है तो दो बूंद बेवफा के पी के देख, सारी उमर नशे में गुज़र जाएगी…..
*********
हुसन पे जब मस्ती छाती है, शायरी पर बहार आती है,
पी के मेहबूब की बदन की शराब, जिन्दगी झूम-झूम जाती है.
*********
दिल की किताब में गुलाब उनका था,
रात की नींद में ख्वाब उनका था,
कितना प्यार करते हो जब हमने पूछा,
मर जायंगे तुम्हारे बिना ये जबाब उनका था.
*********
आंखे है उनकी या है शराब का मेहखना,
देख कर जिनको हो गया हूँ मै दीवाना,
होठ है उनके या है कोई रसीला जाम,
जिनके एहसास की तम्मना मे बीती है मेरी हर शाम.
********
लबो पे आज उनका नाम आ गया,
प्यासे के हाथ में जैसे जाम आ गया,
डोले कदम तो गिरा उनकी बाहों में जाकर,
आज हमारा पीना ही हमारे काम आ गया.
*********
कभी रो के मुस्कुराए , कभी मुस्कुरा के रोए,
जब भी तेरी याद आई तुझे भुला के रोए,
एक तेरा ही तो नाम था जिसे हज़ार बार लिखा,
जितना लिख के खुश हुए उस से ज़यादा मिटा के रोए..
*********
सदियों बाद उस अजनबी से मुलाक़ात हुई, आँखों ही आँखों में चाहत की हर बात हुई,
जाते हुए उसने देखा मुझे चाहत भरी निगाहों से, मेरी भी आँखों से आंसुओं की बरसात हुई.
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देख के हमको वो सर झुकाते हैं,
बुला कर महफ़िल में नजरें चुराते हैं,
नफरत हैं तो कह देते हमसे,
गैरों से मिलकर क्यों दिल जलाते हैं..
********
तरक्की की फसल, हम भी काट लेते..!
थोड़े से तलवे, अगर हम भी चाट लेते..!!
*********
किसी साहिल पे जाऊं एक ही आवाज़ आती ह,ै
तुझे रुकना जहाँ है वो किनारा और है कोई!
*********
नींद को आज भी शिकवा है मेरी आँखों से।
मैंने आने न दिया उसको तेरी याद से पहले।
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जो खानदानी रईस हैं वो, रखते हैं मिजाज़ नर्म अपना..
तुम्हारा लहजा बता रहा है तुम्हारी दौलत नई नई है…
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शुक्रिया मोहब्बत तुने मुझे गम दिया,
वरना शिकायत थी ज़िन्दगी ने जो भी दिया कम दिया…!!
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जब हुई थी मोहब्बत तो लगा किसी अच्छे काम का है सिला।
खबर न थी के गुनाहों कि सजा ऐसे भी मिलती है।
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क्या खूब मेरे क़त्ल का तरीका तूने इजाद किया..
मर जाऊं हिचकियों से, इस कदर तूने याद किया…..!!
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कल रात मैंने अपने सारे ग़म कमरे की दीवारों पे लिख डाले ,
बस हम सोते रहे और दीवारें रोती रहीं …
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रहे सलामत जिंदगी उनकी, जो मेरी खुशी की फरियाद करते है.
ऐ खुदा उनकी जिंदगी खुशियों से भरदे, जो मुझे याद करने में अपना एक पल बर्बाद करते है…..!!
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सिर्फ खुशबू रही ,गुलाब नहीं |
तेरी यादों का भी जवाब नहीं ||
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“संग ए मरमर से तराशा खुदा ने तेरे बदन को,
बाकी जो पत्थर बचा उससे तेरा दिल बना दिया .
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क्या हुआ अगर जिंदगी में हम तन्हा है ???
लेकिन इतनी अहमियत तो दोस्तो में बना ही ली है कि…मेला लग जायेगा उस दिन शमशान में,
जिस दिन मैँ चला जाँऊगा आसमान में !!
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मोहब्बत की राहों में सिर्फ गम ही गम नहीं है,
हर प्यारकरनेवाले की आँखे नम नहीं है,
प्यार तो सिर्फ नाम से बदनाम है,
वरना प्यार में मिलनेवाली खुशिया भी कुछ कम नहीं है
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जब भी देखा मेरे कीरदार पे धब्बा कोई
देर तक बैठ के तन्हाई में रोया कोई
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नज़रों को नज़रों की कमी नही होती,
फूलों को बहारों की कमी नही होती,
फीर क्यू हमे याद करोंगे आप, आप तो आसमान हो और आसमान को सीतारों की कमी नही होती.
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नब्ज़ मेरी देखी और… बीमार लिख दिया,
रोग मेरा उसने… दोस्तों का प्यार लिख दिया,
क़र्ज़दार रहेंगे उम्र भर हम उस हकीम के,
जिसने दवा में दोस्तों का साथ लिख दिया !!!
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जिसे मौका मिलता है पीता जरुर है,
दोस्त,
जाने क्या मिठास है गरीब के खून में ..!!
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ले रहे थे मोहब्बत के बाज़ार में इश्क की चादर…
लोगो ने आवाज़ दी कफन भी ले लो…
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कितने मसरूफ़ हैं हम जिंदगी की कशमकश में…
इबादत भी जल्दी में करते हैं फिर से गुनाह करने के लिए…
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इश्क करने चला है तो कुछ अदब भी सीख लेना, ए दोस्त
इसमें हँसते साथ है पर रोना अकेले ही पड़ता है.
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जब आपका नाम ज़ुबान पर आता है, पता नही दील क्यों मुस्कुराता है,
तसल्ली होती है हमारे दील को,की चलो कोई तो है अपना, जो हर वक़्त याद आता है.
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बैठ जाता हूं मिट्टी पे अक्सर…
क्योंकि मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है….
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थक गया हूँ मै, खुद को साबित करते करते, दोस्तों..
मेरे तरीके गलत हो सकते हैं, लेकिन इरादे नहीं…!!!
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दिल के सागर मे लहरे उठाया ना करो,
ख्वाब बनकर नींद चुराया ना करो,
बहुत चोट लगती है मेरे दिल को,
तुम ख्वाबो में आ कर यू तडपाया ना करो….
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कैसे मुमकिन था किसी दाक्तर से इलाज करना
अरे दोस्त…. इश्क का रोग था…
मम्मी के चप्पल से ही आराम आया….
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समुन्दर से कह दो, अपनी लहरों को समेट के रखे,
ज़िन्दगी में तूफान लाने के लिए, घरवाली ही काफी है….!!
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तलाश है इक ऐसे शक्स की , जो आँखो मे उस वक्त दर्द देख ले,
जब दुनियाँ हमसे कहती है, क्या यार तुम हमेशा हँसते ही रहते हो..
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मज़बूरियाँ थी उनकी…और जुदा हम हुए
तब भी कहते है वो….कि बेवफ़ा हम हुए…..
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छोड़ दो किसी से वफ़ा की आस,
ए दोस्त
जो रुला सकता है, वो भुला भी सकता है.!
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मुझे रिश्तो की लम्बी कतारो से मतलब नही,
ए – दोस्त
कोई दिल से हो मेरा तो बस इक शक्स ही काफी है….
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तेरे डिब्बे की वो दो रोटियाँ…कहीं बिकती नहीं..
माँ, महंगे होटलों में आज भी.. भूख मिटती नहीं….
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ये भी एक तमाशा है बाज़ार-ए-उलफत मेँ गालिब…॥
दिल किसी का होता है और बस किसी का चलता है…॥
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तुम दूर हो मगर यह एहसास होता है,
कोई है जो हर पल दिल के पास होता है,
याद तो सबकी आती है,
मगर तुम्हारी याद का अंदाज़ बहुत ख़ास होता है
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तेरे हुस्न को परदे की ज़रुरत ही क्या है,,
कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद…
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जिन्दगी की उलझनों ने; कम कर दी हमारी शरारते;
और लोग समझते हैं कि; हम समझदार हो गये…..!!
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इतना जलाने के बाद भी, वो ज़ालिम धुआं ढूंढते हे ,
“निकलते हे आंसू कहाँ से इतने”?,पूछकर, कुआं ढूंढते हे…
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गम इस कदर मिला कि घबराकर पी गए हम,
खुशी थोड़ी सी मिली, उसे खुश होकर पी गए हम,
यूं तो ना थे हम पीने के आदी, शराब को तन्हा देखा, तो तरस खाकर पी गए हम..
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जाने कभी गुलाब लगती हे जाने कभी शबाब लगती हे
तेरी आखें ही हमें बहारों का ख्बाब लगती हैं..
मैं पिए रहुं या न पिए रहुं, लड़खड़ाकर ही चलता हु..
क्योकि तेरी गली कि हवा ही मुझे शराब लगती हैं….
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तू मुझे ओर मैं तुझे इल्ज़ाम देते हैं मगर,
अपने अंदर झाँकता तू भी नही, मैं भी नही… !!
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ख़ुशी मेरी तलाश में दिन रात यूँ ही भटकती रही….
कभी उसे मेरा घर ना मिला कभी उसे हम घर ना मिले….!!
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क्यूँ शर्मिंदा करते हो रोज, हाल हमारा पूँछ कर ,
हाल हमारा वही है जो तुमने बना रखा है…
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सोचा था की ख़ुदा के सिवा मुझे कोई बर्बाद कर नही सकता…
फिर उनकी मोहब्बत ने मेरे सारे वहम तोड़ दिए…….
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खुदा का शुक्र है कि उसने ख्वाब बना दिये वर्ना
तुझसे मिलने कि तमन्ना कभी पूरी नहीं होती
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मयखाने बंद कर दे चाहे
लाख दुनिया वाले ,,,
लेकिन!!!!!
शहर में कम नही है,
निगाहों से पिलाने वाले !!!…
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यही सोच के रुक जाता हूँ मैं आते-आते,
फरेब बहुत है यहाँ चाहने वालों की महफ़िल में।
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सब कुछ मिला सुकून की दौलत ना मिली,
एक तुझको भूल जाने की मोहलत ना मिली,
करने को बहुत काम थे अपने लिए,
मगर हमको तेरे ख्याल से फुर्सत ना मिली..
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ख़याल आया तो आपका आया,
आँखे बंद की तो ख्वाब आपका आया,
सोचा कि याद क रलूँ खुदा को पल दो पल,
पर होंठ खुले तो नाम आपका आया.
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कभी वादे भी तोड़ लिया करो तुम,
जरा रूठने का तज़ुर्बा हासिल हो जाए..
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तुम से बिछड के फर्क बस इतना हुआ..
तेरा गया कुछ नहीँ
और मेरा रहा कुछ नहीँ..
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हमारी तडप तो कुछ भी नहीं है हुजुर..
सुना है कि आपके दिदार के लिए तो आइना भी तरसता है…
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आये हो जो आँखों में कुछ देर ठहर जाओ,
एक उम्र गुजरती है एक ख्वाब सजाने में !!!
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वो जो कहता___तुम न मिले तो मर जाएंगे हम…
वो आज भी जिन्दा है,,,ये बात किसी और से कहने के लिए…
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सुना हे, वोह जब मायुश होते हे, हमे बहोत याद करते हे
अये खुदा, अब तुहि बता, उसकी खुशी की दुआ करु या मायुशि कि!!!
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रंगो की बात न करो दोस्तो….!
मैने लोगो को रंग बदलते देखा है !!..
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किसी ने आँख भी खोली तो सोने की नगरी में,
किसी को घर बनाने में ज़माने बीत जाते हैं।
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जमाने के लिए आज होली है …..
मुझे तो तेरी यादे रोज रंग देती है..!!
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जिंदगी जब किसी दो राह पर आती हैं
एक अजीब सी कशमकश में पड जाती हैं
चुनते हैं हम किसी एक राह को
पर दुसरी राह जिंदगी भर याद आती हैं
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पहले मैं होशियार था, इसलिए दुनिया बदलने चला था।
आज मैं समझदार हूँ, इसलिए खुद को बदल रहा हूँ
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युं खामखा न करो रंगों को मुजपे बरबाद दोस्तो…
हम तो पहले से ही रंगे हुऐ है इश्कमें…..
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थक सा गया हूँ , खुद को सही साबित करते करते ,
खुदा गलत हो सकता है , मगर मेरी मुहब्बत नहीं ………..
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यादों में तुम, ख्वाबों में तुम
आँखों में तुम, दिल में तुम
याद करें भी तो कैसे करें दोस्त तुझको
जिसे भुला ना पायें वो ही शक्स हो तुम…..
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खुदा ने कहा दोस्ती न कर, दोस्तो की भीड मेँ तू खो जाएगा
मैने कहा
कभी जमीन पर आकर मेरे दोस्तो से तो मिल, तू भी उपर जाना भूल जाएगा.
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हंसने के बाद क्यों रुलाती है दुनियां,
जाने के बाद क्यों भुला देती है ये दुनियां,
जिंदगी में क्या कोई कसर बाकी थी,
जो मरने के बाद भी जला देती है ये दुनियां.
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खूबियाँ इतनी तो नही हम मे, कि तुम्हे कभी याद आएँगे,
पर इतना तो ऐतबार है हमे खुद पर, आप हमे कभी भूल नही पाएँगे..
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हर् स्कूल में लिखा होता है,असूल तोडना मना है …..!!
हर बाग में लिखा होता है ,फूल तोडना मना है ..!!
हर खेल मैं लिखा होता है ,रूल तोडना मना है ..!!
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काश ..!!
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मोहब्बत और दोस्ती मैं भी लिखा होता की ..,
किसी का दिल तोडना मना है ..!
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वो बार बार पूछती है कि क्या है मौहब्बत ??
अब क्या बताऊं उसे कि उसका पूछना और मेरा न बता पाना ही मौहब्बत है !
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क़यामत टूट पड़ती है ज़रा से होंठ हिलने पर,
जाने क्या हस्र होगा जब वो खुलकर मुस्कुरायेंगे!!!!!
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हथियार तो सिर्फ शौक के लिए रखा करते है,
वरना किसी के मन में खौंफ पेदा करने के लिए तो बस नाम ही काफी हे.
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आंखे भी संभाल कर बंद करना ऐ दोस्तो,
पलको के बीच भी, सपने तुट जाया करते है…!
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दो लब्ज लीखने का सलीका ना था,
उसके प्यार ने मुजे शायर बना दीया…!
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कैसे करूं मुकदमा उस पर उसकी बेवफाई का…
कमबख्त ये दिल भी उसी का वकील निकला…!!
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ये जुदाई मुझे प्यारी है..की इसमे एहसास तुम्हारा है
ये वक्त अकेले रह कर भी..तेरे संग गुज़ारा है !
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जब लगा था तीर तब इतना दर्द न हुआ..
ज़ख्म का एहसास तब हुआ जब कमान देखी अपनों के हाथ में…!!
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जिंदगी कटेगी चैन से, कोई मुरिद ना रखें,
हा, अपने आंसुओ का कोई चस्मदीद ना रखें…
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मै झुकता हूँ हमेशा आँसमा बन के …
जानता हूँ कि ज़मीन को उठने की आदत नही…….
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हमें अंधेरों ने इस कदर घेरा कि
उजालों की पहचान ही खो गयी,
तक़दीर ने हमें इस कदर मारा कि
अपनों की पहचान ही खो गयी,
कोशिशों का हमनें कभी दामन न छोड़ा
पर लगता है हमारी किस्मत ही सो गयी..
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घड़ा सर पर रख कर पानी बड़ी दूर से लाती है,
माँ की होली तो रोज होती है,वो रोज भीग जाती है।
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सूरज ढला तो कद से ऊँचे हो गए साये……
सूरज ढला तो कद से ऊँचे हो गए साये……
कभी इन्ही परछाईयो को पैरों से रौंदते हम गए…

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