जानें बॉथरूम जाने के बाद हाथ धोना कितना है जरूरी

  • बाथरूम में रखी चीजों के जरिये रोगाणु आसानी से फैलते हैं।
  • बाथरूम जाने के बाद हाथ धोकर दूसरों की भी सुरक्षा करें।
  • साबुन के बजाय लिक्विड हैंड वाश का इस्तेमाल बेहतर।
  • सार्वजनिक बाथरूम में करे पेपर टावल आदि का उपयोग।

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  • इसी तरह दूसरे से तीसरे तक स्थानांतरित होती रहती है।समस्या सिर्फ वस्तुएं के छूने से ही नहीं होती। मल त्यागने के बाद हाथ धोना अत्यंत आवश्यक है। विशेषज्ञों के मुताबिक मल में ई.कोली नामक बैक्टीरिया होता है। ई.कोली, इस्चेरिचिया कोली नामक बैक्टीरिया है।
  • हालांकि इ.कोली हमारे इंटेस्टाइन में मौजूद होते हैं। जो कि सामान्यतः परेशानी का सबब नहीं होते। लेकिन यदि ये समस्या करने लगे तो घातक सिद्ध होते हैं। इसके अलावा बाथरूम के दरवाजे, नल आदि जगहों में इतने छोटे छोटे बैक्टीरिया मौजूद होते हैं जिन्हें सामान्य आंखों से नहीं देखा जा सकते। हाथ न धोने के चलते ये आसानी से हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
  • यदि आप बाथरूम के इस्तेमाल के बाद बिन हाथ धोए खाना खा लेते हैं तो रोगाणु बिना किसी संकट आपके शरीर में घुस आपको बीमार कर देते हैं। इसके अलावा आप जिस भी व्यक्ति विशेष के साथ हाथ मिलाते हैं, उसे भी बीमारी के चपेट में ले लेते हैं।
  • ऐसी स्थिति से बचने के लिए आवश्यक है कि बाथरूम के हर इस्तेमाल के बाद हाथ अवश्य धोएं। हाथ धोने से न सिर्फ आप अपनी सुरक्षा कर रहे हैं वरन अपने आसपास के लोगों को भी बीमार होने से बचा रहे हैं।
  • यदि आप सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। संभव हो तो सार्वजनिक शौचालयों में कम से कम जगहों को छुएं। हाथ आवश्यक रूप में धोएं। इसके अलावा अपने पास पेपर सोप, टिश्यू वाइप्स आदि जरूर रखें।
  • सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल करते हुए रोगाणुओं से बचने के लिए पेपर टावल का इस्तेमाल करें। पेपर टावल के जरिये दरवाजे खोलें। नलके खोलने के लिए भी पेपर टावल का ही इस्तेमाल करें।

हालांकि मौजूदा तकनीक के चलते बाथरूम में कई आटोमेटिक सुविधाएं मौजूद हैं। मसलन साबुन के बजाय लिक्विड सोप रखे जाते हैं। नतीजन एक अजनबी के छूए साबुन के इस्तेमाल से हम बच जाते हैं। बहरहाल यदि घर में भी आप साबुन के बजाय लिक्विड हैंड वाश का इस्तेमाल करें तो बेहतर होता है।


दिल की सेहत के लिए कितना नमक जरूरी

नमक के बिना जीवन सम्‍भव नहीं। हमारे शरीर के निर्माण में नमक काफी अहमियत रखता है। नमक का वैज्ञानिक नाम सोडियम क्‍लोराइड है। चीनी और नमक दोनों वास्‍तव में सफेद जहर हैं। अगर आप जरूरत से अधिक नमक का सेवन करते हैं, तो आपको उच्‍च रक्‍तचाप का खतरा काफी बढ़ जाता है। एक स्‍वस्‍थ व्‍यक्ति के लिए रोज करीब साढ़े चार ग्राम यानी एक टी-स्‍पून नमक ही काफी है। थोड़ा नमक शरीर की कार्यप्रणाली को सुचारू रूप से चलाने के लिए जरूरी होता है।




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