मेरी शायरी

 

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जो  प्यार  के  रिश्ते  हम  बनाते  हैं ….
उन्हें लोगों से  क्यूँ  छुपाते हैं ….
अगर  होता  है  गुनाह  किसी  को प्यार करना ….
तो बचपन  से  सब  प्यार  करना  क्यूँ  सिखाते  हैं …..

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शायरी : कुछ अंजान शायरियां

जाने  किस  को  पसंद आ गई  मेरी  आँखों की यह नहीं,

मैं हंसना  भी  चाहूं  तो पल्खें  भीग  जाती हैं i…!!

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हिन्दी शायरियां

तेरी  याद  जो  आई ,तो  आती  चली  गई .
आँखों  से  मेरे  आंसुओं  को  छलकाती  चली  गई .
जब  भी  कभी  दो  पल  फुरसत  के मिले ,
तेरी  ही  बातें  मेरे  दर्द  को  वढ़ाती चली  गई.

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अपनी इस  जिन्दगी  से  “रब ” हम  खुश  है .
जिसमें हमें  आप  जैसा एक “दोस्त ” मिला  है .
हमारी  जिन्दगी  के  “गुलशन ” में  थी  पतझड़  बरसों से
आज  इस  “गुलीस्तान ” में  भी एक “हसीं ” फूल खिला है .Branding

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  • 4 Replies to “मेरी शायरी”

    1. Hey, thanks for the blog post.Really thank you! Really Great.

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