आज मैने अपने दिल की नहीं सुनी, सिर्फ दिमाग की सुनी और न जाने कियो पछतावा ही रहा

दो साल बाद आज फिर मेरी मुलाकात सिमर से हुई
आज मैने अपने दिल की नहीं सुनी, सिर्फ दिमाग की सुनी किओंकी मुझे पता ही किसी का घर के टूटने का कारण मैं नहीं बनना चाहता,

हम शादी करना चाहते थे, पर उसके माता पिता के खिलाफ नहीं जा सकते थे इसलिए नहीं हो पाई, किसी दबाव में आकर उसको अपनी मर्जी के खिलाफ शादी करनी पड़ी. मैंने हमेशा उसकी ख़ुशी चाही इसलिए उससे बहुत दुरिया बना ली कई बार गुस्सा भी किया कहा न मुझे फ़ोन करो और ना मैं आपसे कभी मिलना चाहता हूँ अपना घर बसाओ खुश रहो, मुझे लगता था की वो मुझे भूल जाएगी पर न जाने कियो अब भी शायद वो खुश नही है

जब वो शादी के बाद फिर भी मुझसे बात करती तो उसके माता पिता ने मुझे कसूरवार ठहराया की मैं उसका घर बसने नहीं दे रहा, मेरी उनसे बहुत कहा सुनी हुई जबकि एसा कुछभी नहीं है मैंने कभी भी उसको न फोन किया ना ही कभी बुलाया अपने शहर. मैं अपने आपको समझा सकता था पर किसी और को नहीं

कुछ दिन पहले मुझे पता चला की सिमर इंडिया आई हुई है और कुछ काम के सिलसिले में नैनीताल है, कल उसने मुझे काल की और कहा मेरी सुबह की फ्लाईट है प्लीज अम्बाला मिलते है कुछ देर के लिए मेरे पिता भी मेरे साथ है नैनीतल से आ रही हूँ सिर्फ मिलना है आपसे,  मैंने कहा चलो ठीक है मिलते हैं, मैं जा भी रहा था घर से निकला बस में बैठा ओर दिमाग ने कहा उसके पिता से तो बात करलूं ,  फोन पर पता चला की वो अपने घर बैठे थे, मैं बस से उतरा सिमर को फोन किया और कहा झूठ मत बोलो मुझे पता है आप इकले हो अगर मिलना हो तो अपने परिवार के किसी भी सदस्य को साथ लाये तो हम मिल सकते हैं वरना नहीं   किओंकी दो साल पहले भी बहुत कहा सुनी हुई थी उनसे इसलिए अब और नहीं बहुत हुआ,

उसके पिता के कहने पर, ना मैं उससे कुछ ज्यादा बात कर पाया और न ही इक्कले मिला किओंकी मैंने उसके पिता से वादा किया था की मैं सिमर से दुरी रखूँगा,

जबकि आज फिर वो खुद मिलने आई थी इक्ली, नैनीताल से जालंधर, फिर मेरे कहने पर अपनी बहन जो जालंधर के पास ही रहती है उसको साथ लाई फिर हम मिले और थोड़ी सी बातें हुई
और कुछ कहना चाहती थी शायद नहीं कह पाई, जा ये कहूँ की मैंने उसे कुछ कहने का मोका नहीं दिया, बहुत उदास थी, बस इतना कहा की वो Canada नहीं रहना चाहती 3 साल हो गए 10 से 14 घंटे काम करती हूँ अपने आपको बीजी रखने के लिए, जिमेवारियां बहुत है इसलिए जाना पड़ रहा है और प्लीज ………. बस ये कहकर चुप हो गई , बस फिर वो वापिस चली गई,

जबकि मैं भी सुनना चाहता था की क्या परेशानी है शायद मैं हल कर पाऊं, मेरा दिल जानता है की उसके दिल मैं क्या है शायद जो शादी होने के तीन साल बाद भी मेरे मना करने पर वो आज फिर मुझसे मिलने आई जैसे मैं उसे नहीं भूल पाया शायद वो भी.

उसके प्लीज शब्द  मैं बहुत निराशा थी

कुछ सेकेंड सोचने के बाद मैंने चुप रहना ही बेहतर समझा ( कियोंकि मुझे अपने अंदर देखने का मोका मिला और दिमाग ने कहा की तुम इसके लाईक नहीं हो उसको वो खुशिया फिलहाल नहीं दे सकते जिसकी वो हक़दार है बचपन से वह rich फैमिली से है और मैं मध्यम परिवार से उसका और मेरा फ़िलहाल जमीन आसमान का फर्क है, शादी के बारे में मेरा कोई प्लान भी नहीं है, मुह से शब्द नहीं निकालना नहीं तो शायद वो भी सचमे जा नहीं पायेगी और मेरा दिल भरा था इसलिए आँखों मैं पानी था )

 

यूँ तो कोई शिकायत नहीं मुझे मेरे आज से, मगर कभी-कभी बीता हुआ कल बहुत याद आता है.
किसी ने मुझे कहा था दिल की कभी मत सुनना, बहुत दुख देता है ये दिल, सिर्फ दिमाग की सुनना 
कमबख्त दिमाग भी दर्द दिल को ही देता है
आहिस्ता चल ज़िन्दगी, अभी कई क़र्ज़ चुकाना बाकी है,

कुछ दर्द मिटाना बाकी है, कुछ फ़र्ज़ निभाना बाकी है.




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